सोमवार, 31 जनवरी 2022

मुलाक़ात

नमस्कार मैं हिम!एक साधारण सा दिखने वाला युवा जोअपनी आम ज़िन्दगी में व्यस्त होने का दिखावा करता हुआ एक बस में बैठा हूँ।मुझे मनावर से खलघाट जाना है,वैसे आमतौर पर कभी बस में सफ़र नहीं करता हूं हमेशा अपनी बाइक से कही भी आता जाता हूँ पर आज ऐसे ही मन किया कि बस में चला जाये क्योंकि कम दूरी का सफ़र है एक घण्टे में जहाँ मुझे जाना हैं वहाँ आराम से पहुँच जाऊँगा!बस में क़रीब दो साल बाद बैठा था, बहुत सी सीट खाली थी एक सीट पर खिड़की तरफ बैठ गया और अपना बैग अपनी पास वाली सीट पर रख दिया ताकि कोई और न आकर बैठे। बसचलाना शुरू होने वाली थी कि तब ही मुझे मेरे दोस्त का कॉल आता है मैं उससे कॉल पर बात करने में व्यस्त हो जाता हूँ मेरे पास वाली सीट अब भी खाली थी क्योंकि मेरा बैग वही था बस चालू हुई तो मैंने सोचा कि अब उठा लेता हूँ ताकि जो लोग खड़े हैं उनमें से कोई भी बैठ जाये और मैं फिर कॉल पर बात करता रहा,मेरे पास कोई बैठ गया और वह कोई एक लड़की है यह मुझे तब पता लगा जब मैंने कॉल रखा।मेरे पास एक लड़की बैठी थी इतिहास मैं पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ कि सफ़र करते हुए कोई अनजान लड़की मेरे पास बैठी हो,मैंने उसकी तरफ देखा यह देखते हुए कि कहीं वो मुझे उसको देखते हुए न देख ले।यह कोरोना का समय था सब मास्क लगा कर ही रखते थे तो आँखों के अलवा चेहरा नहीं देख सका।मैं गाने सुनने लगा और खिड़की के बाहर देखने लगा और उस लड़की से अपना ध्यान हटा दिया। कुछ देर बाद मुझे एहसास हुआ कि मेरे कंधे पर वो लड़की का सर सहारा लेने को छुआ जा रहा था जब उसकी तरफ देखा तो पाया कि वो सो रही थी अब हम लड़के ठहरे कुछ न कहाँ! अगर इसी का उल्टा हुआ होता और मुझे गलती से नींद आ जाती तब मैं उसके कंधे पर सर रख देता तो क्रिया के प्रतिक्रिया स्वरूप शायद मुझे बस से उतारा भी जा सकता था लेकिन वो लड़की थी मेरे दिमाग तब यह धुन बजने लगी "प्यार की राह पर चलना सीखें!!!"

थोड़ी ही देर में उसे एहसास हो आया की वह जिस कंधे का सहारा लेकर सो रही है वह अपरिचित है और उसका सहारा नहीं लेना चाहिए।बस में भीड़ होने के कारण उसकी सीट के पास एक लड़का टिक कर खड़ा था इसीलिये वो मेरी तरफ़ झुक कर बैठी थी जिसके कारण उसका सर मेरे कंधे पर आ गया था यह मुझे अब समझ आया तो मैंने उस लड़की से बात की और कहाँ कि आप खिड़की तरफ आ जाये मैं उस तरफ हो जाता हूँ ताकि आप असहज न हो।

चूँकि मैंने अपनी खिड़की वाली सीट का बलिदान दिया था तो उसने शुक्रिया कहाँ और हम दोनों की बात थोड़ी होना शुरू हुई। उसने मुझे बताया कि वह यहाँ कॉलेज परीक्षा देने आयी थी , वह धरमपुरी रहती हैं सुबह जल्दी से आने के कारण नींद भी पूरी नहीं हुई थी और इसी के साथ बात खत्म हुई वो खिड़की पर सर रख कर सो गयी।मैं भीड़ को देखता रहा आते जाते तब ही एक आंटी दो बच्चों सहित एक गमला लेकर बस में बैठने को आयी। गमला मेरे पीछे वाली सीट के पास रखा था और अचानक उस गमले से एक गिरगिट महाशय प्रकट हो कर मेरी बायीं सीट के टेके वाले भाग पर जा बैठे चूँकि बस मैं कॉलेज कि ही बहुत सी वीरांगनायें थी जो उस छोटे से जीव को देख चिल्लाने लगी जिसे सुनकर मेरा भी ध्यान उधर गया और वो लड़की जो सो रही थी मेरे पास, वो भी उठ गयी। जैसे ही उसकी नज़र उस गिरगिट पर गयी उसने मेरे हाथ को कसकर डर से पकड़ लिया और मैंने भी खुद को तब किसी फिल्म का हीरों मानकर उस अपनी डरी हुई नायिका को भरोसा दिलाना चाहा कि मेरे होते हुए यह गिरगिट तुम्हें छू भी नहीं पायेगा। शायद मेरी बात उस गिरगिट ने सुन ली और वो वापस उस गमले में चला गया। बस को रोककर उस गमलें से उसे भगा दिया गया पर उस गिरगिट ने हम दोनों को बात करने का बहाना दे दिया था।मैं और वो लड़की उसकी इस बहादुरी पर हँसे और अलग-अलग विषय पर बातें करने लगें ही थे कि अचानक उसका गाँव धरमपुरी आ गया।मैंने उससे कहाँ आपका गाँव आ गया।वो बड़े अनमने मन से सीट से उठी और पास खड़ी हुई। मैंने उसको अलविदा कह दिया वो बस के पीछे वाले दरवाजे तक गयी वहाँ से उसने एक आखिर बार पलट कर देखा और मैंने भी; मैंने अपना हाथ उठाकर विदा ली।तभी मेरे दिमाग में सज्जद अली की गायी हुई ग़ज़ल का एक शेर गूँजने लगा "ज़माने भर की बातें उनसे कह दी।जो कहना चाहिये था वो कहाँ नई।"

न मैंने उससे उसका नाम पूछा और न उसने मुझसे।पहचान करने को बस याद रह गयी तो वो भूरी आँखे।जब तक मैं उठकर बस के दरवाज़े तक पहुँचता बस चल कर बहुत आगे आ चुकी थी।

आज इस बात को बीतें दो साल हो गए बस की खिड़की वाली सीट पर बैठा हूँ, बैग वही पास की सीट पर रखा है और मुझे पता है कि अब उस दिन जैसा फ़िल्मी दोबारा नहीं होने वाला हैं।

-हिम

मन

 इंदौर के भंवरकुआं के पास भोलाराम मार्ग पर कुछ अपने ख़ुद के सपने लिये, तो कुछ अपने अभिभावकों द्वारा चुनें गये सपने लिये और तो कुछ दूसरों की स...