मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

युवा मतदाता


 18 वर्ष का मतदाता
    भारत में हो रहे लोकसभा चुनाव का तीसरा चरण पुर्ण हो चुका है और इसी बिच सभी राजनेता अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए लगे हुए है, ताकि अपने मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सके। स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए मतदाताओं का अहम योगदान होता है, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जब मतदाताओं को जागरूक करने की आवश्यकता महसुस हुई तब तात्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील ने ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ का शुभारंभ 25 जनवरी 2011 को किया। मतदाता को अपना मत देने के लिए जरुरी है कि उसका नाम उसके निर्वाचक क्षेत्र की निर्वाचक सूची  में दर्ज हो , निर्वाचक सूची में नाम शामिल करवाने के लिए शर्त है कि आपकी न्युनतम आयु 18 वर्ष की हो तथा आप भारत के नागरिक हो। 28 मार्च 1989 से पहले तक न्युनतम आयु 21 वर्ष तक थी जिसे संविधान के 61 वें संसोधन अधिनियम,1988 के तहत न्युनतम आयु को 18 वर्ष कर दिया गया है।
     भारत ऐसा देश है जहाँ 18 वर्ष कि आयु में अधिकत्तर युवा अपने करिअर तक के चुनाव के लिए अपने अभिभावकों पर निर्भर करते हैं तो चाहें लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव दोनों में जो मत देने वाले इस उम्र के मतदाता है उनका मत अधिकत्तर अपना मत ना होकर वह मत उनके अभिभावकों का हो जाता हैं क्योकि इस उम्र के मतदाताओं को राजनीति खराब लगती है वो अपने क्षेत्र के राजनेताओं तक को लगभग नहीं जानते है, जबकि पुरे विश्व में भारत ही एक मात्र एसा देश है जहाँ 2 करोड़ 80 लाख से ज्यादा मतदाता 18 से 19 वर्ष के उम्र में हैं। एसा माना जा रहा है कि अभी लोकसभा चुनाव के नतिजों में परिवर्तन इन युवा मतदातओं के कारण ही होने वाला है, जबकि इन मतदाताओं को अपनी ताकत तक का अंदाजा नहीं है। यह मतदाता अपना मत किसी प्रत्याशी को  सिर्फ इसलिए देने वाले है क्योंकि उस प्रत्याशी को मत देने के लिए उनके अभिभावकों ने उनसे कहा हुआ हैं।ऐसे मतदाताओं को नहीं पता है कि इनका यह एक मत इनके आने वाले आगे के पाँच सालों को प्रभावित करने वाला है। यह मतदाता सोचते है कि यदि वह अच्छे से सिर्फ अपने करिअर पर ध्यान दे तो उनका भविष्य सुरक्षित हो जायेगा फिर राजनीति का उनके जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
     मेरा इन युवा भविष्य निर्माताओं से कहना है कि यदि आप लोग इस सक्रिय राजनीति से अनभिज्ञ रहे तो वह दिन दुर नहीं है जब आप सब वर्तमान में अपना करिअर बनाने में लगे होंगे तब उसी समय आपके द्वारा गलती से चुने गये कोई अयोग्य राजनेता द्वारा आपका भविष्य ही खत्म कर दिया जायेगा। अब यह आप पर हैं भविष्य बचाना है या अपना भविष्य किन्ही अयोग्यों के हाथ में छोड़ना है।           
    
                                                                                                         हिमांशु मंगला वर्मा “हिम”

1 टिप्पणी:

  1. नयी और अपनी सोच के साथ लोकतंत्र को जिन्दा रखें 👍
    शानदार लेख @हिमांशु_मंगला_वर्मा

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