बुधवार, 24 अप्रैल 2019

मन की सुंदरता


मन की सुंदरता  
उत्तरप्रदेश के एक कस्बे में रात को 9 बजे होंगे उस समय रसोइघर में माँ और बेटी दोनों रात का खाना बना रहे थे , कड़ाई में तेल गरम हो चुका था तो बेटी ने कच्ची पुरी को उस कड़ाई में जल्दी जल्दी में डाला जिससे तेल के गरम छीटें उसके हाथ पर उड़ गए जिससे उसके मुँह से चीख निकल गयी, बेटी की चीख सूनकर माँ ने तुरंत उसकी तरफ देखकर कहा तेल का ही छीटा है अभी तक तो आदत हो जानी चाहिये तुझे,गरम तेल ही है कोई तेज़ाब नहीं;चल कोई न जल्दी से जा कर हाथ पर दाँत साफ करने वाला पेस्ट लगा ले,ठीक हो जायेगा। बेटी रसोईघर से निकलकर अपने कमरे में गयी । कमरे में वह पेस्ट ढुंढ ही रही थी कि अचानक उसे अपने कमरे के ठीक बाहर सीढीयों से उतरते हुये चार परछायी दिखी; वह दोड़कर कमरे का दरवाजा बंद करने ही वाली थी अचानक उनमें से एक परछायी जो अब आदमी में बदल गयी थी उसके सामने वह बंदुक ताने खड़ा हो गया और उसे चुप रहने का हाथ से ईशारा किया, वह चिल्लाने वाली है यह देखकर उस आदमी ने उसके मुँह को बलपुर्वक दबा दिया और उसको धक्का देकर कमरे में प्रवेश कर गया, उसके पीछे उसके साथी भी कमरे में प्रवेश कर गये। उसी समय उनमे से किसी एक ने कहा “इसी ने तेरा प्रेम प्रस्ताव अस्विकार किया था न, आज इसको इसकी गलती का अहसास करवाते।“ यह बोलने की देर थी, तभी उनमें से एक दुस्साशन की तरह कर्ण की बात सुन द्रोपदी का चीरहरण करने आगे बड़ा। परंतु जब उसे बलपुर्वक दुष्कर्म करने में सफलता नहीं मिली तब बाकि दो साथी भी उसकी सहायता करने लगे और इस हाथापायी में उस बेटी के मुँह पर से हाथ हटा वह वैसे ही खौफ़ से चिल्लाने लगी और यह आवाज सुनते ही रसोईघर से उसकी माँ दौड़कर उसकी सहायता के लिए दौड़ पड़ी । उसकी माँ को आता देख उनके चौथे साथी ने उसके साथीयों को भागने के लिए कहा और जैसे उसके साथी उस बेटी से दुर हुये वैसे ही उसने अपने जैब से एक बाटल निकाली जिसमें कुछ तरल पदार्थ भरा था उसे उस बेटी के ऊपर डालकर भाग गया।उस बेटी को जहाँ जहाँ भी वह तरल पदार्थ ने छुआ था वहाँ अत्याधिक जलन होने लगी और यह जलन उस तेल की जलन से कई हजार गुना ज्यादा  थी इस जलन के कारण वह छटपटाती हुई ज़मीन पर गिरकर बेहोश हो गयी।
करीब एक महीने बाद वह बेटी पुरी तल रही थी कि अचानक उसके हाथ पर तेल उड़ गया , इस बार वह चिल्लाई नहीं, रसोई में ही काम कर रही अपनी माँ को कहाँ ‌-“ देखो माँ , अब मुझे आदत हो गयी है। अब मुझे तेल के जलने से जलन नहीं हो रही है।“ माँ यह सुनकर कुछ बोल नहीं पायी बस उनकी आँखों से दो आँसूओं की धारा स्वतन्त्र हो गयी।
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              “ प्रेम प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था “ सिर्फ इसलिए तुमने उस लड़की से बदला लेने की सोची थी, सुनो! अगर तुमने उससे प्रेम किया होता तो यह कृत्य करने का कभी सोच भी नहीं पाते। ठीक ही किया था, तुम्हें अस्विकार करके।लड़को तुम्हें क्या लगता है कि लड़कीया कोई वस्तु है जो तुम्हारे हट करने पर तुम उन्हें पा सकते हो। और यह तुम्हारा कोई प्रेम नहीं होता है यह सिर्फ तुम्हारा उसके प्रति शारीरीक आकर्षण मात्र होता है तभी तो तुमने उसके शरीर को पाने की कोशिश करने में भी असफल रहें तब तुमने तेज़ाब डालकर उसके शरीर को नुकसान पहुँचाया,उसकी शारीरिक सुंदरता खत्म करना चाही पर तुम्हें क्या पता कि प्रेम तन की सुंदरता देख नहीं होता मन की सुंदरता देख होता है और आज भी उसका मन उतना ही सुंदर है जितना पहले था तुम उसकी सुंदरता को खत्म करने में असफल हो गये, तुम हर तरह से हार गए हो। 
                                                                                 हिमांशु मंगला वर्मा “हिम”

मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

युवा मतदाता


 18 वर्ष का मतदाता
    भारत में हो रहे लोकसभा चुनाव का तीसरा चरण पुर्ण हो चुका है और इसी बिच सभी राजनेता अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए लगे हुए है, ताकि अपने मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सके। स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए मतदाताओं का अहम योगदान होता है, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जब मतदाताओं को जागरूक करने की आवश्यकता महसुस हुई तब तात्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील ने ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ का शुभारंभ 25 जनवरी 2011 को किया। मतदाता को अपना मत देने के लिए जरुरी है कि उसका नाम उसके निर्वाचक क्षेत्र की निर्वाचक सूची  में दर्ज हो , निर्वाचक सूची में नाम शामिल करवाने के लिए शर्त है कि आपकी न्युनतम आयु 18 वर्ष की हो तथा आप भारत के नागरिक हो। 28 मार्च 1989 से पहले तक न्युनतम आयु 21 वर्ष तक थी जिसे संविधान के 61 वें संसोधन अधिनियम,1988 के तहत न्युनतम आयु को 18 वर्ष कर दिया गया है।
     भारत ऐसा देश है जहाँ 18 वर्ष कि आयु में अधिकत्तर युवा अपने करिअर तक के चुनाव के लिए अपने अभिभावकों पर निर्भर करते हैं तो चाहें लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव दोनों में जो मत देने वाले इस उम्र के मतदाता है उनका मत अधिकत्तर अपना मत ना होकर वह मत उनके अभिभावकों का हो जाता हैं क्योकि इस उम्र के मतदाताओं को राजनीति खराब लगती है वो अपने क्षेत्र के राजनेताओं तक को लगभग नहीं जानते है, जबकि पुरे विश्व में भारत ही एक मात्र एसा देश है जहाँ 2 करोड़ 80 लाख से ज्यादा मतदाता 18 से 19 वर्ष के उम्र में हैं। एसा माना जा रहा है कि अभी लोकसभा चुनाव के नतिजों में परिवर्तन इन युवा मतदातओं के कारण ही होने वाला है, जबकि इन मतदाताओं को अपनी ताकत तक का अंदाजा नहीं है। यह मतदाता अपना मत किसी प्रत्याशी को  सिर्फ इसलिए देने वाले है क्योंकि उस प्रत्याशी को मत देने के लिए उनके अभिभावकों ने उनसे कहा हुआ हैं।ऐसे मतदाताओं को नहीं पता है कि इनका यह एक मत इनके आने वाले आगे के पाँच सालों को प्रभावित करने वाला है। यह मतदाता सोचते है कि यदि वह अच्छे से सिर्फ अपने करिअर पर ध्यान दे तो उनका भविष्य सुरक्षित हो जायेगा फिर राजनीति का उनके जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
     मेरा इन युवा भविष्य निर्माताओं से कहना है कि यदि आप लोग इस सक्रिय राजनीति से अनभिज्ञ रहे तो वह दिन दुर नहीं है जब आप सब वर्तमान में अपना करिअर बनाने में लगे होंगे तब उसी समय आपके द्वारा गलती से चुने गये कोई अयोग्य राजनेता द्वारा आपका भविष्य ही खत्म कर दिया जायेगा। अब यह आप पर हैं भविष्य बचाना है या अपना भविष्य किन्ही अयोग्यों के हाथ में छोड़ना है।           
    
                                                                                                         हिमांशु मंगला वर्मा “हिम”

मन

 इंदौर के भंवरकुआं के पास भोलाराम मार्ग पर कुछ अपने ख़ुद के सपने लिये, तो कुछ अपने अभिभावकों द्वारा चुनें गये सपने लिये और तो कुछ दूसरों की स...