मन की सुंदरता
उत्तरप्रदेश के एक कस्बे में रात को
9 बजे होंगे उस समय रसोइघर में माँ और बेटी दोनों रात का खाना बना रहे थे ,
कड़ाई में तेल गरम हो चुका था तो बेटी ने कच्ची पुरी को उस कड़ाई में
जल्दी जल्दी में डाला जिससे तेल के गरम छीटें उसके हाथ पर उड़ गए जिससे उसके मुँह
से चीख निकल गयी, बेटी की चीख सूनकर माँ ने तुरंत उसकी तरफ
देखकर कहा तेल का ही छीटा है अभी तक तो आदत हो जानी चाहिये तुझे,गरम तेल ही है कोई तेज़ाब नहीं;चल कोई न जल्दी से जा
कर हाथ पर दाँत साफ करने वाला पेस्ट लगा ले,ठीक हो जायेगा। बेटी
रसोईघर से निकलकर अपने कमरे में गयी । कमरे में वह पेस्ट ढुंढ ही रही थी कि अचानक
उसे अपने कमरे के ठीक बाहर सीढीयों से उतरते हुये चार परछायी दिखी; वह दोड़कर कमरे का दरवाजा बंद करने ही वाली थी अचानक उनमें से एक परछायी जो
अब आदमी में बदल गयी थी उसके सामने वह बंदुक ताने खड़ा हो गया और उसे चुप रहने का
हाथ से ईशारा किया, वह चिल्लाने वाली है यह देखकर उस आदमी ने
उसके मुँह को बलपुर्वक दबा दिया और उसको धक्का देकर कमरे में प्रवेश कर गया, उसके पीछे उसके साथी भी कमरे में प्रवेश कर गये। उसी समय उनमे से किसी एक
ने कहा “इसी ने तेरा प्रेम प्रस्ताव अस्विकार किया था न, आज
इसको इसकी गलती का अहसास करवाते।“ यह बोलने की देर थी, तभी
उनमें से एक दुस्साशन की तरह कर्ण की बात सुन द्रोपदी का चीरहरण करने आगे बड़ा।
परंतु जब उसे बलपुर्वक दुष्कर्म करने में सफलता नहीं मिली तब बाकि दो साथी भी उसकी
सहायता करने लगे और इस हाथापायी में उस बेटी के मुँह पर से हाथ हटा वह वैसे ही खौफ़
से चिल्लाने लगी और यह आवाज सुनते ही रसोईघर से उसकी माँ दौड़कर उसकी सहायता के लिए
दौड़ पड़ी । उसकी माँ को आता देख उनके चौथे साथी ने उसके साथीयों को भागने के लिए
कहा और जैसे उसके साथी उस बेटी से दुर हुये वैसे ही उसने अपने जैब से एक बाटल
निकाली जिसमें कुछ तरल पदार्थ भरा था उसे उस बेटी के ऊपर डालकर भाग गया।उस बेटी को
जहाँ जहाँ भी वह तरल पदार्थ ने छुआ था वहाँ अत्याधिक जलन होने लगी और यह जलन उस
तेल की जलन से कई हजार गुना ज्यादा थी इस
जलन के कारण वह छटपटाती हुई ज़मीन पर गिरकर बेहोश हो गयी।
करीब एक महीने बाद वह बेटी पुरी तल
रही थी कि अचानक उसके हाथ पर तेल उड़ गया , इस
बार वह चिल्लाई नहीं, रसोई में ही काम कर रही अपनी माँ को
कहाँ -“ देखो माँ , अब मुझे आदत हो
गयी है। अब मुझे तेल के जलने से जलन नहीं हो रही है।“ माँ यह सुनकर कुछ बोल नहीं
पायी बस उनकी आँखों से दो आँसूओं की धारा स्वतन्त्र हो गयी।
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“ प्रेम प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया
था “ सिर्फ इसलिए तुमने उस लड़की से बदला लेने की सोची थी,
सुनो! अगर तुमने उससे प्रेम किया होता तो यह कृत्य करने का कभी सोच
भी नहीं पाते। ठीक ही किया था, तुम्हें अस्विकार करके।लड़को
तुम्हें क्या लगता है कि लड़कीया कोई वस्तु है जो तुम्हारे हट करने पर तुम उन्हें
पा सकते हो। और यह तुम्हारा कोई प्रेम नहीं होता है यह सिर्फ तुम्हारा उसके प्रति
शारीरीक आकर्षण मात्र होता है तभी तो तुमने उसके शरीर को पाने की कोशिश करने में
भी असफल रहें तब तुमने तेज़ाब डालकर उसके शरीर को नुकसान पहुँचाया,उसकी शारीरिक सुंदरता खत्म करना चाही पर तुम्हें क्या पता कि प्रेम तन की
सुंदरता देख नहीं होता मन की सुंदरता देख होता है और आज भी उसका मन उतना ही सुंदर
है जितना पहले था तुम उसकी सुंदरता को खत्म करने में असफल हो गये, तुम हर तरह से हार गए हो।
हिमांशु
मंगला वर्मा “हिम”
Waaaahhhh
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया
हटाएंबहुत सुंदर....👌🏻👍🏻
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